हे कृष्ण
जब प्यार मारा जाता है
युद्ध भूमि में
तुम नहीं करते
पक्ष-विपक्ष के तर्क,
सही-गलत पर चर्चा,
कह देते हो
"हर बार मेरा ही खून बहता है।"
जब तुम चक्र चलाते हो
या ग्वाल-बालों के संग होते हो
या सारथी बने रहते हो
या राजा-काज चलाते हो
तो राधा तुम्हें उतना ही चाहती है
जितने के तुम अधिकारी हो।
तुम बाण से बिधे
किस-किस को याद कर
शेष महाभारत को छोड़
मनुष्य को परखते हो?
परीक्षित जिनकी तुम रक्षा करते हो
नाग द्वारा डस दिये जाते हैं
जनमेयजय के नाग यज्ञ में
तक्षक नाग फिर बच जाता है,
यों आधा-अधूरा महाभारत
हमारे बीच पसर
फिर कलियुग ले आता है।
**महेश रौतेला