उफ्फ और कितनी धीरे धीरे से ढलती हैं ये रात
हौले हौले रात भर कानों में घोलती हैं तिरि बात
परत दर परत और कितनी धुंधली होंगी ये रात
चुपके चुपके धीरे धीरे तन्हाईयां घोलती ये रात
बेबसी बस यहीं हैं दिल ही दिल में रह गई बात
पराई सी तेरी ही तरह फरेबी सी लगें हैं ये रात
उफ्फ और कितनी.....
-Deepak Bundela AryMoulik