ठुकराओ अब, के प्यार करो, मैं नशे में हूँ
जो चाहो मेरे यार करो, मैं नशे में हूँ
अब भी दिला रहा हूँ यक़ीन-ऐ-वफ़ा मगर
मेरा ना एतबार करो, मैं नशे में हूँ
(यक़ीन-ऐ-वफ़ा = वफ़ा का भरोसा)
गिरने दो तुम मुझे, मेरा साग़र संभाल लो
इतना तो मेरे यार करो, मैं नशे में हूँ
(साग़र = शराब का प्याला)
मुझको क़दम-क़दम पे भटकने दो वाइज़ों
तुम अपना कारोबार करो, मैं नशे में हूँ
(वाइज़ = धर्मोपदेशक),
फ़िर बेख़ुदी में हद से गुज़रने लगा हूँ मैं
इतना ना मुझसे प्यार करो, मैं नशे में हूँ
(बेख़ुदी = बेख़बरी, आत्मविस्मृति)
-शाहिद कबीर