समय, पल, क्षण, काल, निमिष ।
1समय
समय बड़ा बलवान है, क्या राजा क्या रंक ।
पल में वही पछाड़ता, करता वही निशंक ।।
समय बदलता जा रहा, होते फोटो-शूट।
संस्कार अब रो रहे, बँधे किनारे खूट ।
2 पल
पल दो पल की जिंदगी, हँसी-खुशी से जीत ।
समय दुबारा कब मिले, बिछडे़ंगे हर-मीत ।।
घर का कोना देखता, बालक हुए जवान।
विस्मृत पल ऐसे हुए, याद करें हैरान।।
3 क्षण
प्रेम नेह की डोर में, बंँधकर पा सम्मान ।
क्षण भंगुर यह देह है, मत कर तू अभिमान।।
क्षण में सब बदले यहाँ, वर्तमान अरु भूत ।
कहाँ भविष्य ले जाए, कथा बाँचता सूत।।
4 काल
काल करे सो आज कर, कल पर क्यों विश्वास।
किसको कल का है पता, टूट न जाए साँस।।
काल खड़ा है द्वार में, नहीं दिखेगी भोर।
ईश्वर का तू ध्यान कर, पकड़ अभी से छोर।।
5 निमिष
निमिष-निमिष हम बढ़ रहे, मंजिल की ही ओर।
आज विश्व फिर देखता, जगत गुरू का दोर ।।
कोरोना के घाव ने , दिया जगत आघात।
प्राण-निमिष जाते रहे, भारत ने दी मात।।
मनोज कुमार शुक्ल " मनोज "
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