मैं गिर जाऊ अगर तो उठा पाओगे
इश्क बहोतो ने किया हे तुम निभा पाओगे
मुझे यहां रह कर तुमसे प्यार नहीं करना है
इजहार करना है मगर बेशुमार नही करना है
यन्हा मिलने पर पाबंदी है जात पात का रोना है
ओजल होती राते है
बेबात इश्क का खोना है
जलने वालो की बाते है धुंधले होते नाते है
चल कही दूर चलते हे
जन्हा बंदिशे बहुत ढीली होगी और बारिश थोड़ी ज्यादा गीली होगी
जन्हा का आफताब बहुत गहरा होगा
और समय बेवजह ही ठहरा होगा
जनहा आंखे नम होगी और बाते बेहद कम होगी जहां आसमा गुलाबी सा छाया होगा ओर मेरे चहरे पे तेरी जुल्फ का साया होगा इस पार न सही उस पार तो पालूंगा तुजे
उस पार तुझे जन्हा में कही छुपाना नही होगा इश्क बें इंतहा होगा पर