संध्याकाल विष्णुजी की आरती संध्याकाल
-ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
भगवान् श्री हरी विष्णु
माता लक्ष्मी आपको
संध्या वंदन प्रणाम नमन
नमस्कार है ब्रह्मदत्त
त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का
शुभ संध्या वंदन बृहस्पतिवार वीरवार गुरुवार-ब्रह्मदत्त त्यागी
ॐ जय जगदीश हरे,
प्रभु! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट,
क्षण में दूर करे।। ॐ जय ..
जो ध्यावै फल पावै,
दुःख बिनसै मनका।
सुख सम्पत्ति घर आवै,
कष्ट मिटे तनका॥ ॐ जय ..
मात-पिता तुम मेरे,
शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
आस करूँ जिसकी॥ॐ जय ..
तुम पूरन परमात्मा,
तुम अंतर्यामी।
पार ब्रह्म परमेश्वर,
तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय ..
तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता।
मैं मुरख खल कामी,
कृपा करो भर्ता॥
तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय,
तुमको मैं कुमती।। ॐ जय ..
दीनबन्धु,दु:खहर्ता तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ,
द्वार पडा तेरे॥ ॐ जय ..
विषय विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढाओ,
संतन की सेवा।। ॐ जय ..
प्रस्तुतकर्ता -ब्रह्मदत्त त्यागी
हापुड़