पतिव्रत धर्म
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मानव जीवन में
कदम कदम पर धर्म की मर्यादा
सुनिश्चित होती है।
ऐसे में पति या पत्नी धर्म विचित्र नहीं है।
पति का कर्त्तव्य असीमित है
पत्नी के लिए पति ही सब कुछ है
पत्नी का जीवन पति के सानिध्य पर
आजीवन टिका है,
पति की खातिर ही तो
पत्नी का जीवन समर्पित है।
पत्नी के लिए पति धरती का भगवान है
पत्नी के सुख दुख में
भागीदार बनना पतिधर्म है।
पत्नी की मान मर्यादा की रक्षा
आवश्यकताओं की पूर्ति करना
पति का कर्त्तव्य है,
पति के बिना पत्नी अधूरी है
परंतु पति पत्नी एक दूजे के
जीवन की धुरी हैं।
पत्नी को पति का प्यार चाहिए
एक अकेली पत्नी ही है
जिसमें रिश्तों का संसार चाहिए।
पत्नी सिर्फ़ पत्नी नहीं होती
हर दिन पति से उसे
माँ, बहन, बेटी सा व्यवहार चाहिए।
पत्नी ही है हर दिन हमारे लिए
हर रिश्तों का भान कराती है
पत्नी होकर भी पति संग
कितने अप्रत्यक्ष रिश्ते निभाती है।
पति को भी उससे सीख लेनी चाहिए
पतिव्रत धर्म की आशा से आगे बढ़िए
पतिधर्म के हर कर्तव्य निभाने चाहिए।
पत्नी तो पतिव्रत धर्म निभा ही रही है,
पत्नी की खुशी की खातिर आपको भी
सब कुछ करने की सदा
कोशिश करते रहना चाहिए।
पति हैं तो पतिधर्म भी निभाइए
पतिव्रत धर्म तो वो सदा ही निभाती है
पत्नी को भी गर्व का अहसास कराइये।
पतिव्रत धर्म पत्नी निभाए
चाहते हैं बहुत अच्छा है,
मगर आप भी तो पतिधर्म निभाइए।
✍ सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित