और जब हम मिल रहे होंगे शोर में सन्नाटा होगा! बादलों की गरज में हमारी आँखें बातें करेंगी और ज़ुबान हों जाएँगी बेज़ुबान!
मिलेंगे हम मुसाफ़िरों की भीड़ में! अचानक से ट्रेन देगी हौरन और बीत जाएगा वो इंतज़ार!
फिर निकालूँगा मैं एक हाथ से झूमके और घुटने पे बैठ के पूछूँगा... "अपनी ज़िंदगी बर्बाद करोगी मेरे साथ?"
जवाब तुम्हारा जो भी हो पर सर्प्राइजेस बेहिसाब होंगे! और खिल उठेगी तुम्हारी आँखें! भीनी भीनी मुस्कान से! देख लेना! 💜