देखो हे कितना बेचारा
पागल.....
दर बदर भटकता हे बेसहारा
पागल.....
एक बार को तो आया तरस मेरी हालत पर
फिर उन्होंने कहा मुझे दोबारा
पागल....
अभिना रख पैर पानीकी सतेह पर
अभी तो बहोत दूर हे किनारा
पागल....
हमने खत में लिखा हाले दिल अपना
और उस खत के आखिरमे लिखा
तुम्हारा पागल......
में चाहता था किस्से इसक के मशहूर हो
किसे करना था यहाँ गुज़ारा
पागल...
-Jayesh vaghela