टूट कर भी मैंने संजोए रखा है खुद को
तारीफ की कभी आदत ही नहीं पर
फिर भी हर काम में जी को डुबोया रखा है मैंने
काश कि आश मैं कभी नहीं सोचा
जो हुआ जैसे हुआ सबको अपनाया है मैंने
ताश की तरह कभी भी किसी को अपने फायदे के लिए किसी से रिश्ता नहीं बनाया मैंने Bindu Anurag
और हर बार भलाई के दौरान धोखा खाया है मैंने
धोखे खाने के बाद भी हर एक रिश्ते को पूरी ईमानदारी से निभाया है मैंने
टूट कर भी मैंने संजोए रखा है खुद को
हु मैं सबसे अलग इसी सोच के साथ
जैसे को तैसा जवाब नहीं दिया मैंने
कुछ पाने के लिए कुछ खोना सीखा है मैंने
सच कहूं तो सब कुछ खोकर भी बहुत कुछ पाया है मैंने
टूट कर भी मैंने संजोए रखा है खुद को
जिंदगी की चौराह पर हमेशा खुद को केंद्र बिंदु में पाया है मैंने