पाऊं मे जंजीर आज भी है
जिसका नाम संस्कार है
ये हमारी कोई सुरक्षा नहीं
ये उनका अंहकार है
बेमतलबी सवाल तेरे
जवाब बने बहस मेरे
बोलना बना बदतमीजी
ऐसी एक चिड़िया कि कहानी
"मुंह चलना बंध कर ।
चुप होजा ख़तम कर
तू नादान है नासमझ है
बुरे भले कि कहा परख है
वो तेरा इस्तमाल करेगा
फिर कूड़ा फेक देगा
ये पिंजारा हिफाजत करेगा
दाना पानी भी मिलेगा
बस सलाखों के पीछे रहना है
हँसना है गाना है पर
पिंजारा ना तोड़ ना है
टुटा तो हमारे नाम का क्या
हमे मिलते सन्मान का क्या
एक चीडा आएगा
तुझे उडा ले जाएगा
तू अकेले मत उड़ना
उसके साथ डोरी
अपनी बांधे रखाना
वो जहां उड़े तू भी उड़ सकेगी
उसका आसमा तू भी देख सकेगी
चिडियां बोली,
पर वो तो उसका आसमान होगा मेरा नहीं..!
पर एक चिड़ा है
जिसे मे जानती हूँ
उसके आसमा को मे अपना मानती हूँ
बाँध दो डोरी उसके साथ
शायद हो जाऊ मे आज़ाद।
दिए खोलने पर सिखाने को उड़ान
उसका मिला ये नतीजा
मुँह फट वापस पिंजरे मे चली जा
डोरी बंधेगी उससे जिसे हम कहेगे
आसमा चाहे कोई भी हो तेरा चीडा हम चुनेगे
बहस करना छोड़ दे
मुँह अपना बंध कर
चुप होजा खत्म कर
नादान है नासमझ है
जैसा हम कहे ऐसा कर
ये तो ना सिखाया था
ना थी ऐसी उम्मीद
ये सिला दिया भरोसे का
जो दिया मौका पंख फैलाने का
अब तु ना उड़ेगी
ना देखिगी आसमान
एक खिडकी का टुकड़ा
ओर हसना गाना पिंजरे मे
ये हि है तेरी छोटी दुनिया
अरे देख उन चिड़िया को
वो भी कहा उडा करती है
वो भी ऐसे हि बूढ़ी होती है
पर
एक दिन चिड़िया उड़ेगी
पिंजरा साथ ले उड़ेगी
जंजीरो से कटेगी
सलाखे टूटेगी
पंख खुद देंगे परवाज उड़ान को
पंख है कोमल चिडा है दूर
पर ये चिड़िया उड़ेगी ज़रूर
अपनी ज़िन्दगी जियेगी जरूर
-Yayawargi