हॉस्पिटल के बरामदे में बैठकर आते जाते लोगो को देखना , हरेक चेहरे पर अजीब से भाव , हर कोई दर्द से भरा हुआ .........हरेक के चेहरे पर अपने अपनों के दर्द की रेखाए पर कोई कोई चेहरा अपने मास्क के नीचे से विद्रूपता धारण किये हुए भी ........... कितना अजीब लगता हैं
हर कोई आम होता हैं वहां ......हरेक का दर्द ज्यादा .............. वेदना के शब्द नही होते बस आवाज़ होती हैं ..कही घुटती हुयी तो कई रुलाई में .कही आँखों से अविरल बहती हुयी तो कही शून्य में तकती हुयी ...ख्याल सबका एक ....अब क्या होगा ............अगले पल
जिन्दगी हैं न ........... होती हैं इसकी कीमत नही मालूम होती और जब सांसे अपनी डोर तोड़ने लगे तो हर धड़कन तेज़ होने लगती हैं फिर भी जिन्दगी कीमती होती हैं सबकी सबके अपनों के लिय अपने चाहने वालो के लिए।
तभी एक बार सालो पहले मेरी कलम ने कहा था
सुना होगा तुमने दर्द की भी एक हद होती है
मिलो हमसे हम अक्सर उसके पार ही जाते है ।।
तुम भी तो मेरे हो न जिन्दगी भर के लिये...
पर अब मुझे इस जिन्दगी का भरोसा नही रहा .
दर्दो की इतन्हा है लेकिन ठहाके भी तो है ना
आओ न
चलो अब कोई और वादा करो .......
...... मुझसे ...
मुझे जीना हैं अभी तुम्हारे लिये
और तुमको
मेरे लिये और तेरे मेरे अपनों के लिये
है ना
आखिर में बनेंगे तो हम सब एक कहानी ही न