शीर्षक: दर्द की छांव में
दर्द दिल में बहुत, सबकी अपनी दास्तां है
कुछ खुद का , कुछ का रिश्तों से वास्ता है
खुद के दर्द तो, स्वयं से सदा जवान रहते है
रिश्तों के दर्द, भीतर और बाहर से रिसते है
साजो-सामान से सजी, जिंदगी कमजोर है
कुछ कमजोरी के चोर भी, उसके ही अंदर है
रिश्तों के दर्द दिल में, छाँव तले बसेरा करते है
लम्बी उम्र के ये मालिक, रुह सँग दफन होते है
राह-गुजर अब योंही, सदमों में बीत जायेगी
शिकायत करने से, जिंदगी बदनाम हो जायेगो
मोड़ एक दिन आयेगा, सूरज अस्त हो जायेगा
सुबह का इँतजार भी, दिल को रास न आयेगा
खुदा खैर करे उनकी, जिनका मुझसे दिल टूटा
क्या अब उनसे शिकायत ? जिन्होंने मुझे भी लूटा
✍️कमल भंसाली
-Kamal Bhansali