लाख छुपाओ तुम मेरी नजरों से अपनी नजरें
फिर भी,
मेरे दिल ने तेरी नजरों का इशारा समज लिया ।
छुपाने से तो बातें छुपती हैं,
नजरों की भाषा तो बोलती है।
होठों से लब्ज निकल नही पाते
मगर,
आँखों से तो बयां हो ही जाते है।
ये इश्क है जनाब , छुपाने से छुपता नही ।