सरकार
सरकार तेजी से चल रही है।
जनता नाहक डर रही है।
सर के ऊपर से कार निकल रही है।
सर को कार का पता नही
कार को सर का पता नही
पर सरकार चल रही है।
हर पाँच साल में जनता
सर को बदल देती है।
कार जैसी थी
वैसी ही रहती है।
सर बदल गया है
कार भी बदल गई है
आ गई है नई मुसीबत
सर और कार में
नही हो पा रहा है ताल मेल
लेकिन सरकार
फिर भी चल रही है।
जनता जहाँ थी वही है
परिवर्तन की चाहत में
सर धुन रही है।