आज भी जब आवाज सुनती हूं तेरी
आंखें फिर नम हो जाती हैं मेरी
ना खुद को मिटा पा रही, ना खुद को बना पा रही
कुछ अजीब सी हालत है मेरी
जानती हूं तू बहुत दूर है जिंदगी
पर आज भी राह तकती हैं आंखें मेरी
कभी फिर से दो बोल, बोल तो जिंदगी
यह खामोशी अब जान ले रही है मेरी
सोचती हूं हो जाऊं तन्हा मैं भी
पर साथ कहां छोड़ती हैं यादें तेरी