इस नीले आकाश के नीचे
अद्भुत संसार है,
हर कोण पर विवाद है
हर विवाद पर कई-कई आबाद हैं।
इस नीले आकाश के नीचे
सबसे बड़े प्राण हैं
प्राणों की आग में
सब जलता-तपता है,
उबल-उबल कर सब बुझता है।
प्यार जितना हुआ नहीं
उससे अधिक जाना जाता है,
श्रमदान किया जाता है
तब कौवा भी कुछ पाता है।
* महेश रौतेला