सवाल छोटा सा था जो पूरी जिंदगी बर्बाद कर ली
भूलू कैसे उन बातो को जिसे किताबो सी याद कर ली
ले रो देती हु हर रोज की तरह आज भी
ये कैसे खेल में मैने जिंदगी बर्बाद कर ली
मैं आज भी , जो जाती उन गलियों में
गलती से जो मैने आखों में बात कर ली
मैं आज भी वही तूने बदले की बात भी कर ली
आज भी सिसकियां वैसी है
आज भी में टूटी हु
बैठी मेरी देह यही में तेरे संग रहती हु
मुझको वो साथ लौटा दे
मैं आज भी लिखने बैठी हु
मुझको वो अल्फाज लौटा दे
-@njali