कभी सोना कभी चांदी कभी हीरा बन जाओ न।
कर के प्रीत श्याम से कभी मीरा बन जाओ न।
मैं न जानूँ इश्क मुहब्बत न ही जानूं अंधा प्यार।
हार के अपना दिल मुझ पर तुम मेरा बन जाओ न।
इश्क जुदाई प्यार अधूरा मुहब्बत कब पूरी होती है।
दे के मुझको उजली साँझ तुम सवेरा बन जाओ न।
त्याग और कुर्बानी मांगे ये मुहब्बत रानी न।
दे के मुझको प्रीत का तोहफा तुम अधूरा बन जाओ न