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जहाँ की दौलत न खरीद पाए जिनको प्यार के दो बोल पे ये बिकने वाले लोग
बे-दिली से क्या यूँही दिन गुज़र जाएंगे सिर्फ़ ज़िंदा रहे तो हम मर जाएंगे
मुझकों मालूम है जो कुछ मेरी तक़दीर में है मैं ने ठोकर खा कर समझा हादसा क्या चीज़ है...
जिस गली से गुज़रते कभी बेमतलब मुस्कुराए थे आदतन वहा क़दम आज भी डगमगाए थे
अना कि क़ैद से निकले मुक़ाबला तो करे, मगर एहसास अपनों सा वो अंजान दिलाता रोज़ है
हमसे पहले था अज़ब तेरे जहाँ का मंज़र तब को पत्थर में खुदा था,अब कि इंसान में भी नहीं
मैं उसकी बदलती कहाँनियों में बह जाता हूँ काश की गहराई होती मेरी कुछ ज़ियादा..
शेर कह कर अदाओं पर ना हमकों आज़माने बैठिए, ये दिलजलों कि महफ़िल है यहाँ ना दिल लगाने बैठिए..
सदा तेरी तिलस्मी है शरारा तेरी नज़र हम ठहरे शरीफ़ बात बिगाड़े तेरी नज़र
ક્યાંય મારા હોવાનું પ્રમાણ ન મળ્યું મન ઈશારાથી આ કઈ રાહ બતાવી તે..
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