#पंखुरी पंखुरी मन
11) आत्मा
व्याकुल आत्मा पुकारती रही बार-बार,
समझ ना पाए हम हर बार,
सोचा हवा ने झकझोरा द्वार,
एक बार नहीं पुकारा,
पुकारा कई बार...
मन में समाया डर,
फिर हुई आहट,
किया उजाला खोला द्वार,
फिर ना पाया किसी को बाहर,
व्याकुल आत्मा पुकारती रही बार-बार..
एक दिन पुकारा,
दो दिन पुकारा,
श्वासें अब उखड़ने-सी लगी,
लग रहा था,
सामने खड़े यम,
फिर किया अन्तिम प्रयत्न..
फिर पुकारा एक बार,
अब मन हुआ अधीर,
दौड़ पड़ा उस द्वार,
जहाँ से आवाज आई बार बार..
अस्पताल के पलंग पर पड़ा शरीर,
बिना हलचल, बेबस, लाचार,
छोड़ गई शरीर आत्मा,
बिना कुछ कहे..!!
व्याकुल आत्मा पुकारती रही बार बार..।।
🌹सुमन कुमावत🌹