शीर्षक : जीवन विभिन्न रूप में
मकसद विहीन हो, जीवन सही रास्ता भूल जाता
विपत्तियों के जंगल में, आपदाओं से घिर जाता
भूल जाता जो पथ, वो पथ-हार ही कहलाता
पर भूला, सही रास्ता पा जाता, तो देव् कहलाता
जीने के लिए, हजार मकसद की राहें न चुनना
सही तो होता है, संयमित कुछ राहों पर चलना
हार और जीत कभी भी, बहुत दिन के नहीं मेहमान
दुनियादारी निभावे इंसान, साथ में रखे सिर्फ ईमान
गुलशन में फूल ही अच्छे लगते, कांटे तो अहसास देते
चिंतन में सत्य न हो तो हजारों चिता को रास्ता बता ते
बड़े भाग्यशाली है, जो कहते है, ये जिंदगी हमारी है
सोचों, वो क्या सोचते, जिनको न कहने की लाचारी है
✍️ कमल भंसाली