उसके दिल में हमारा ना घर रहा
जबसे किसी और ने किया वहाँ बसेरा
मेरे ख्वाबो का टुटना उसे दिखाई नहीं दिया
जब खुद के ख्वाबो को उसने हकीकत में बदलते हुए देखा
वैसे तो बहुत अच्छा था सफर हमारा
मगर उसे किसी और में सच्चा हमसफ़र दिखा
ना प्यार रहा नाम दोस्ती रही
जबसे उसे किसी और में अपना यार दिखा
माना की कोई और तुम्हारा ख्वाब था
मगर क्या हमारा बिचडना जरुरी था?