*कमी निकालने वाली प्रवृति की वजह से सभी में कमी निकालना एक स्वभाव सा बन जाता है* ! फ़िर व्यक्ति कुछ भी बुरा होने का दोष भगवान पर मढ देता है ! *हम कहते है कि हमनें भगवान का इतना पूजा - पाठ किया और बदले में उन्होंने हमें यह परेशानियां दी ! मगर इसके विपरीत जब कुछ अच्छा होता है , तब हम खुद को ही शाबाशी देते हैं* ! यह हमेशा कमी निकालने वाला नजरिया हमारे अहंकार को बढाए रहता है ! यह अहंकार सही और गलत में फ़र्क करने की हमारी क्षमता को खत्म कर देता है ! ऐसे में व्यक्ति सच और झूठ में अंतर नहीं कर पाता और ऐसी हालत में फ़ंसे व्यक्ति का ज्ञाण नष्ट हो जाता है ! ऐसा होते ही बुद्दि भ्रमित होने लगती है और भ्रमित बुद्दि व्यक्ति का नाश कर देती है ! " सुप्रभात जी "
।। जय सियाराम जी ।।