जो निकले मेरे जनाजे की बस्ती
मस्ती में ही आजाना
जो टूटे मेरे हाथो में कंगन उनको मुझको पहना जाना
मैं सोई रही जो मुझे उठा जाना
जो निकले जनाजे देखो आशु को न तू लाना
अब न मैं लूटूगी खुशियां तो माना जाना
जो देखो मेरे जनाजे को जाते
हमको गले से लगा आना
जो ओढ़ी मैने कफन की घूंघट अपना रंग लगा जाना
-@njali