*ग़ज़ल*
है नशीली जनाब की सूरत ।
नूर बिखरा शबाब की सूरत ।
दिल पे मेरे ख़ुमार कैसा है ।
जब से देखी जनाब की सूरत ।
जान लेती हूँ तेरी बातें मैं ।
चश्म तेरी किताब की सूरत ।
होश आया नहीं मुझे अब तक
तेरी सूरत ,शराब की सूरत ।
प्यार लक्ष्मी बयाँ करे कैसे
उसकी चाहत हुबाब की सूरत ।
लक्ष्मी चौबे