मिली मुझें वो इक मोड पर,
जो गई थी मुझे जो छोड़ कर।
धड़कन रुकी गई अचानक मन की,
जैसे जान निकल गई मेरे तन की।
धीरे से वो आगे बढ़ी,
पलकों को झुका लिया,
आखों में आशु थे उसके,
सीने से लगा लिया।
जो गई थी एक दिल तोड़ कर,
मना रही थी आज वो दोनों हाथ जोड़कर,
कल मिली मुझें वो इक मोड पर,
जो गई थी मुझे जो छोड़ कर।।
-Anand Phogat