ज़िंदगी से बातें
ज़िंदगी तुझ में मै हू
मुझ में तू है
तू नही तो मै नही
मै नही तो तू नही
तूने अपने खजाने से
खुशी और गम सबको बाँटे है
किसी के हिस्से में ज्यादा
किसी के हिस्से मे कम
सबका हिसाब तू रखती है
जब तेरा मन करता है
तू एक क्षण में
हिसाब माँग लेती है
तेरे वजूद से मेरा वजूद है
मेरे वजूद से तेरा वजूद है
तुझसे मै जानी जाती हू
मुझसे तू पहचानी जाती है
मै तुझसे शिकायत करती हू
तू मूझसे शिकायत करती हू
फिर भी मै तुझसे प्यार करती हू
तू मुझसे प्यार करती है ज़िंदगी
स्वरचित
कविता
सुरभि