न आसमान हूँ जो हजारों परींदो की उड़ान समाये,
न जमीं हूँ जो करोडों जीवन को गोदमें खेलाये,
न वो नदी हूं जो कोसों तक खुशहाली फैलाये,
न फलाफल वृक्ष हूँ जो संत की उपमा पाये,
न सूरज, न अग्नि, न दिया,जो जलकर वंदना पाये,
तेरे दिये कुछ वक्त में ऐसै पल चाहुँ जो तुझे पसंद आये।
--वर्षा शाह