सुबह एक ख्याल आया,
कि कल रात मै क्यो नही सो पाया।
नींद से शिकायते की,
तो बोली तेरी आँखो ने कहाँ इजाजत दी।।
आँखो से पुछा हुआ क्या है तुझे,
मै क्या बताओ तेरे दिल ने नम कर रखा है मुझे।
मै थक हार दिल के पास गया,
दिल ने कहा बिन किराया दिये क्यों तेरा किरायेदार गया।।
ना जाने ये दस्तूर जमाने ने कैसे बनाए है,
कुछ ही पल के लिए लोग दिल-ए-सराय में आए है।
खैर लिखते लिखते ये नज्म मै सो गया,
मै उनके जाने से ही नि.र.स. हो गया।।
-नि.र.स.