कह दे तो तुझसे बताया न करुँ ,उठ रही मन की शंका जताया न करुँ , शब्दों के लाग लपेट भाते हैं तुझे भी तो , सत्य बोल तुझे रिझाया न करुँ , ये शंकायें प्रेम पर चलती आँधियाँ हैं , हल की चाह से उसे बचाया न करुँ ? बता !बता ! बता !! भावों को जाया न करुँ ???
-Ruchi Dixit