तुम कल फिर आना मेरे प्रेममे सज-संवरकर।
एक लट गालों पर ओर बालों पे गजरा सजाकर।
नाकमें नथनी ओर हरि बिंदियां का श्रृंगार लगाकर।
कानों में झुमका ओर लाल रंग की चुडीया पहनकर।
होंठ गुलाबी ओर हिरनी सी अंखीयामे कजरा निखारकर।
लाल पिले पलु को प्यारे से मुख पर आना ओढ़कर।
शरमाते हुए थोड़ा आईने से आंखों की पलकें झुकाकर।
तुम आना पेरो की पायल की मीठी झनकार सुनाकर।
फिर हम भी कह देंगे अपने दिल की बात दिल खोलकर।
कर लेना अपना समझकर तुम भी हमसे दिल का इकरार।
दोस्ती भी ना टुटेगी ना दिल, रखना हमारा इतना ईतबार।
नर