यादों को तुम कुछ मत कहना
यादों को तुम कुछ मत कहना
जब पगडण्डी से आहट ले लूँ ,
विद्यालय से पाठ चुरा लूँ ,
नदियों में जनम मिला दूँ ,
घर-घर की दिवार पकड़ लूँ ,
सीढ़ियों से आवाज लगा दूँ ,
वक्त से जन्म - वार पूछ लूँ |
यादों को तुम कुछ मत कहना
जब देश पर चर्चा छेडूँ ,
इतिहास पर मन को धो दूँ ,
नालन्दा को मानक मानूँ ,
तक्षशिला को छू कर आऊँ ,
प्यार को सौ - सौ बार पकड़ लूँ ,
आँसुओं से क्षण को धो लूँ ,
वृक्षों की छाया में आऊँ ,
झीलों का साहचर्य थाम लूँ ,
पहाड़ों का आध्यात्म जान लूँ ,
आसमान के ध्रुव को देखूँ |
यादों को तुम कुछ मत कहना
जब तेरे हाथ मुझ तक आवें ,
मेरे शब्द तुम तक जावें ,
जब मोड़ों से मुड़ जाना हो ,
होठों से जब हँस लेना हो ,
खिली साँस पर रूक जाना हो ,
टेड़ी - मेड़ी द्रुत गति की इन ,
यादों को तुम कुछ मत कहना |
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*महेश रौतेला
१७.०४.२०१५