*शरणागत में अभिमान नहीं रहता*
🍀 शरणागत में किसी भी प्रकार का अभिमान शेष नहीं रहता, दीनता का अभिमान भी अभिमान हो जाता है परन्तु शरणागत दीन नहीं होता, क्योंकि उसका शरण्य से पूर्ण अपनत्व होता है 🍀
🍀 अपनत्व और दासता में भेद है - दासता बन्धन का कारण है और अपनत्व स्वतन्त्रता का कारण है; अपनत्व होने से भिन्नता का भाव मिट जाता है, भिन्नता मिटते ही स्वतन्त्रता अपने-आप आ जाती है, भिन्नता का भाव उत्पन्न होने पर ही प्राणी में किसी-न-किसी प्रकार का अभिमान उत्पन्न होता है 🍀
🍀 शरणागत होने पर अभिमान गल जाता है, अभिमान गलते ही भिन्नता एकता में विलीन हो जाती है, एकता होने पर भय शेष नहीं रहता, अतः शरणागत सब प्रकार से अभय हो जाता है 🍀🌳🌴🌳🌲#दिपकचिटणीस ✍🏻✍🏻