🌇🌇🌇🌇🌇🌇🌇🌇🌇🌇 🩸🩸🩸शुभ प्रभातम्🩸🩸🩸
_*हमारी सृष्टि अहम् से ही रची हुई है। अहम् (मैं) मिट जायगा तो हमारे लिये संसार मिट जायगा। जब तक अहंकार है, तब तक संसार है। अहंकार के कारण ही मनुष्य अपने को एकदेशीय देखता है, अन्यथा वह सर्वव्यापी है ‘नित्यः सर्वगतः’।*_
_*आँख इतनी बड़ी है कि उससे कितना ही देख लें, वह कभी भरती नहीं। आँख से भी मन बड़ा है, मन से बुद्धि बड़ी है, बुद्धि से अहम् बड़ा है और अहम् से भी आप स्वयं बड़े हैं।*_
_*आपके एक अंश में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड हैं। आप अहम् के आश्रय, आधार, प्रकाशक और अधिष्ठान हैं। आप अहम् के आश्रित नहीं हैं। आपके एक देश में अहम् है। आपकी एकता परमात्मा से है। आप अहम् से रहित हैं। गाढ़ नींद में अहम् नहीं रहता, पर आप रहते हैं। आपके भीतर अनन्त ब्रह्माण्ड हैं।*_
🐄🐄🐄🐄🙏🐄🐄🐄🐄#दिपकचिटणीस