सादगी सा कोई शृंगार नही,
उसके जैसा कोई पहनाव नही,
कभी देखा है आईनेमे खूद को,
तेरी सादगी का कोई कमाल नही ।
ढूंढते है लोग रंगीन मिजाज को ,यहां
हम भी बडी शान से कह देते है,
मिल लो एक बार मेरी यार को ,
मशहूर है उसकी खुश मिजाजी,
पर उसकी सादगी का कोई जवाब नही।
- Nidhi Mehta