चलो तुम्हे अपने साथ ले चलूं
मैं अकेली क्यों जो ज़ख्म तुमने दिया एहसास तो करो
ये क्यों ,,ऐसा क्यों ,,ना जाने कितने क्यों ,,,
इन बेवजह के सवालों का ही जवाब दे दो
चलो तुम्हे अपने साथ ले चलूं
वक़्त के सिलवटों का मूझपे जो असर हुआ उसकी निशानी से तुम बेज़ार क्यों रहो ,,,,,
खुली हवा , अनगिनत तारें ,भिनी भीनी खुशबू और मैं अकेली मौन तन्हा,,,आज महसूस तुम भी करो
चलो तुम्हे अपने साथ ले चलूं
ना प्रेम ना तिरस्कार , ना मान ना अपमान ,ना उद्वेग ना कोई भाव ,,,इतना शांत निर्मम राते ,,,
आज जाग कर तुम भी देखो ना ,
चलो तुम्हे अपने साथ ले चलूं