यह प्यार तुम्हारा ही था
मैंने पहिचाना नहीं,
ऐसा स्नेह तुम्हारा ही था
मैंने जाना नहीं।
यह आवाज तुम्हारी थी
मैंने सुनी नहीं,
यह प्रतीक्षा तुम्हारी थी
मैंने समझी नहीं।
यह सौन्दर्य तुम्हारा था
मैंने देखा नहीं,
यह झुकाव तुम्हारा था
मैंने चुना नहीं।
यह पूछताछ तुम्हारी थी
मुझ तक पहुँची नहीं,
यह पूजा तुम्हारी थी
मैंने सोचा ही नहीं।
यह प्यार तुम्हारा ही था
मैंने पहिचाना नहीं ।
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महेश रौतेला