जहन-ए-इश्क को दो दिल से एक जान बनाया गया,
ये इतिफाक का सौदा खुदा से मंजूर कराया गया।
जब मिले दूर रह कर भी, अंजान को जान बनाया गया,
दिनों के उजाले से रात के अंधेरों को फुसलाया गया।
प्यार , मोहोब्बत, दिल्लगी का जुनून एक शायरी में सँवारा गया,
और उसके लफ़्ज़ों से बनी शायरी पढ़ के उसे सरेआम मशहूर बनाया गया।
❣️ DEAR ZINDAGI ❣️