मन को थोड़ी उड़ान चाहिए
महलों की खुराक चाहिए,
तन को अच्छा स्वास्थ चाहिए
घर जैसा मधुर वास चाहिए।
मन को मीठी याद चाहिए
हराभरा संसार चाहिए,
आँखों को प्यारा दृश्य चाहिए
लम्बा, चलता ध्यान चाहिए।
कहने को बड़ा इतिहास चाहिए
स्वर्ण काल के कथन चाहिए,
कैसे गिरे थे वह बोध चाहिए
अमृत का थोड़ा स्वाद चाहिए।
**महेश रौतेला