रेखता के सौजन्य से🙏👇🏿
ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है!
हम तो इस जीने के हाथों मर चले
.........ख्वाजा मीर हसन
सदा ऐश दौराँ दिखाता नहीं
गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं
.......ख्वाजा मीर हसन
ख़ुदा के वास्ते इस को न टोको
यही इक शहर में क़ातिल रहा है
.....मजहस मिर्ज़ा- जान ए- जाना
तर-दामनी पे शैख़ हमारी न जाइयो
दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वज़ू करें
.....ख्वाजा मीर दर्द
जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे
तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे