एक पत्ता शजर-ए-उम्र से लो और गिरा,
लोग कहते हैं मुबारक हो नया साल तुम्हें।
पिछ्ला बरस तो ख़ून रुला कर गुज़र गया,
क्या गुल खिलाएगा ये नया साल दोस्तो ।
न शब ओ रोज़ ही बदले हैं न हाल अच्छा है,
किस बरहमन ने कहा था कि ये साल अच्छा है।
किसी को साल-ए-नौ की क्या मुबारकबाद दी जाए,
कैलन्डर के बदलने से मुक़द्दर कब बदलता है ।”
Courtesy ~ Pannalal Roy ji.