किसी के साथ विवश होकर रिश्ते में ना रहो, यदि हृदय में अंश मात्र भी संदेह हो तो दूर हो जाओ उससे, जैसे पतझड़ में पत्ते छूट जाते हैं वृक्ष से और नए पुष्प और पत्ते आ जाते हैं वसंत में, पर तुम अमरबेल बन ना लिपट जाना की उसका अस्तित्व ही ओझल कर दो... समय रहते, सहजता है दूरी बना लो...!!!