आवारापन बंजारापन, एक खला है सीने में
हर दम हर पल बेचैनी है, कौन बला है सीने में
इस धरती पर जिस पल सूरज
रोज़ सवेरे उगता है
अपने लिए तो ठीक उसी पल
रोज़ ढला है सीने में
आवारापन...
जाने ये कैसी आग लगी है
इसमें धुआं ना चिंगारी
हो ना हो इस बार कहीं कोई
ख्वाब जला है सीने में
आवारापन...
जिस रस्ते पर तपता सूरज
सारी रात नहीं ढलता
इश्क कीऐसे राह-गुज़र को
हमने चुना है सीने में
आवारापन...
कहाँ किसी के लिए है मुमकिन
सब के लिए एक-सा होना
थोड़ा-सा दिल मेरा बुरा है
थोड़ा भला है सीने में
आवारापन...