कई बार ऐसा भी लगता है
कि गुमनाम रहना ही ठीक है,
ठीक है कि मै गुमनाम रहूं,
और गुमनामी वाला जीवन जीता रहूं ,
इस व्यर्थ के प्रतिस्पर्धा के आग में
कुछ विरले प्रतिघात में
तड़पना अब अच्छा नहीं लगता, इससे अच्छा तो मैं
तंद्रा के तरुवर के छाव में ही डूबता जाऊ
-Srishtichouhan