बदलेगा ये वक्त फिर, बदलेगा ये जमाना भी।
ये ख़ुशी तू जा अभी,लौट कर आना फिर।
कश्तियाँ भवँर में फंसी है कुछ वक्त के लिए।
अभी इंतिज़ार है मुझे समंदर का आना फिर।
कुछ सीखा है हमने कुछ सीख रहा हूँ अपनों से।
कभी ख़ुशी मिली है तो गम दिया अपनों का जाना भी।
कहते हैं वक़्त बड़े से बड़े ज़ख्मो को भर देता है।
कभी दुःख देता है तो सिखा देता है मुस्कुराना भी।
दर्द और दुःख के बीच जिसने भी जिया है जिंदंगी को
वो सीख जाता है एक दिन अपनों के बिन गुनगुनाना भी।
ऐसा नही है कि उसे अपनों के खोने का गम नही "अर्जुन"
छोटी सी जिंदगी में बहुत मुश्किल है अपनों को भुलाना भी