रात घनी अंधेरी है ,ऐसे में तुम आ जाओ न।
महक उठे ये फ़िज़ा राग कोई तुम गाओ न।
जैसे नब्ज़ थम रही हो साँसे मद्धिम हो रही।
सर्दी भी बढ़ गयी है आग ज़रा सुलगाओ न।
आंखे बंद होने को हैं होठ भी कंपकपा रहे।
दिल मेरा बैठ रहा तुम धड़कन बन जाओ न।
चाँद है अपने शबाब पर तारे भी टिमटिमा रहे ।
आ के मेरा हाथ थाम लो मुझसे अब शरमाओ न।