"तुम वही हो ...
जो मैं हूँ,
मैं भी वही हूँ...
जो तुम हो,
तुम और मैं में जो..है..
वही...हर किसी में है।
हर किसी में जो है
वही मुझ में है..।
मुझ में सब..
और सब में मैं...
यही भाव इस संसार में
मेरे लिए ...संग
सब के लिए
'सुन्दरतम्'..सुखद
सूचना एवं खबर है।।"
©डॉ.अमित दवे,खड़गदा
धन्यवाद