इतनी सी बात है
नाराज़ क्यों होते हो,
बस इतनी सी तो बात है।
एहसास मुझे समझाने नही आते,
और तुम्हें ये समझ नही आते।
तुम्हें इज़हार करना नही आता,
और मुझे इतंज़ार ए इज़हार रहता है।
जानती हूं तुमहे प्यार बहुत है,
पर कभी जताया भी करो।
निगाहों से ही बातें करते हो,
कभी कुछ सुना भी दिया करो।
तुम्हारे दिल की ज़ुबाँ भी समझते है,
पर हाल ए दिल भी कभी बयां किया करो।
खामोश प्यार को समझ कर ही हाँ कहा है,
कभी कहकहे प्यार का भी एहसास कराया करिए।
कौन कह रहा है प्यार का प्रचार करिए,
पर कभी तन्हा में इज़हार ए मोहब्बत ज़ुबाँ से तो करिए।
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©स्वाति अमर✍️