दफा हम नहीं ,दफा हमारी तुमसे जुड़ी यादें भी नहीं,
तवज्जो की फ़िक्र अब हमे बिल्कुल भी नहीं तुमसे , तुम अब हमारे हमनवा नहीं,
गलत ना तुम हो पर बेवफ़ा हम भी नहीं ,
सुरूर पर कदर दर की है पर इस दरख़्त में तुम्हारी छाव अब भी नहीं,
मरकत की मजार में अब शिरक़त नहीं,
क्यूंकि दिल के मस्ज़िद का अब कोई ख़ुदा नहीं